Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को होने वाली आम बीमारियॉं
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की बीमारियॉं
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बीमारीयॉ का होना काफी आम बात है| इस अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ में साधारण या आम बीमारीयों का वरà¥à¤£à¤¨ दिया है|
à¤à¤¾à¤°à¤¤ की जनसंखà¥à¤¯à¤¾ का 40 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ 14 साल से कम के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का है। उसमें हर सौ बचà¥à¤šà¥‹ में से लगà¤à¤— 12 बचà¥à¤šà¥‡ असल में 5 साल से कम उमà¥à¤° के हैं। बीमारी और मौत छोटी उमà¥à¤° के साथ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हावी रहते हैं। 100 जवित पैदा हà¥à¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में से 5 की म़तà¥à¤¯à¥ अपनी उमà¥à¤° का à¤à¤• साल पूरा करने से पहले ही हो जाती हैं। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की यह मृतà¥à¤¯à¥ दर विकसित देशों की मृतà¥à¤¯à¥ दर से काफी ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है। विकसित देशों में यह दर à¤à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ से à¤à¥€ कम है। à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की लंबाई और वजन के पैटरà¥à¤¨ को और उनकी बीमारियों को देखें तो हमें पता चलता है कि उनका सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ à¤à¥€ अचà¥à¤›à¤¾ नहीं है। करीब 40 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की वृदà¥à¤§à¤¿ ठीक नहीं हà¥à¤ˆ होती और वो कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤¿à¤¤ होते हैं।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के खराब सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ और मौतों का कारण रहन सहन के खसà¥à¤¤à¤¾ हालात ही है। इन हालातों के कारण ही कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£, संकà¥à¤°à¤®à¤£ रोग और दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾à¤“ं की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‰à¤‚ निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ होती हैं। à¤à¤¾à¤°à¤¤ के अधिकांश समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ में लडकीयॉ के लिये जनà¥à¤® से ही और à¤à¥€ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मà¥à¤¶à¥à¤•िल परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‰à¤‚ हैं। गरà¥à¤ में लडकी का पता चलते ही उसे गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ कर निकाल देना और लडकी को जनà¥à¤® के तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ बाद ही खतम कर देना या बाहर कà¥à¤¡à¥‡à¤¦à¤¾à¤¨ पर फेंक देना à¤à¥€ यहॉं काफी समसà¥à¤¯à¤¾ है। कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£, बीमारी, देखà¤à¤¾à¤² का अà¤à¤¾à¤µ और मौतें à¤à¥€ बचà¥à¤šà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के मामले में ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देखने को मिलते हैं। इसी कारण से à¤à¤¾à¤°à¤¤ में लिंग अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤ यानी पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के मà¥à¤•ाबले महिलाओं या लड़कों में मà¥à¤•ाबले लड़कियों की संखà¥à¤¯à¤¾ कम है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में बड़े सà¥à¤¤à¤° पर बीमारियॉं होने के बावजूद यहॉं बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सेवाओं का अà¤à¤¾à¤µ है। गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ इलाकों के अधिकांश सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾ और निजी चिकितà¥à¤¸à¤¾à¤•रà¥à¤®à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सेवाओं के लिठपà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ नहीं हैं। खास बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की देखà¤à¤¾à¤² के लिठचलाठगठआंगनवाड़ी कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® à¤à¥€ पूरक पोषण और टीकाकरण तक ही सीमित रहते हैं। इसके अलावा कई कई बचà¥à¤šà¥‡ घरों में ही पैदा होते हैं और नवजात शिशà¥à¤“ं की ठीक देखà¤à¤¾à¤² à¤à¥€ नहीं होती है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में ३० पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का जनà¥à¤® के समय वजन कम होता है और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जिऩà¥à¤¦à¤¾ रहने के लिठकाफी संघरà¥à¤· करना पड़ता है। इस अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ से आपको बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की देखà¤à¤¾à¤² के बारे में समà¤à¤¨à¥‡ में मदद मिलेगी।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की बीमारियो की à¤à¤• सूची
* पाचन तंतà¥à¤°
दांत निकलने की परेशानियॉं, मà¥à¤–पाक, उलà¥à¤Ÿà¤¿ व अमाशà¥à¤¯à¤¶à¥‹à¤¥, दसà¥à¤¤, पेचिश, पेट में दरà¥à¤¦, पीलिया, क़मि, मोतीà¤à¤°à¤¾, दोहद, कबà¥à¤œà¤¼ और दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾ से ज़हर चला जाना।
* शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤°
जà¥à¤•ाम खॉंसी, टॉनà¥à¤¸à¤¿à¤² या कंठशालूक का शोथ, गला खराब होना (गलदाह), वायà¥à¤µà¤¿à¤µà¤¿à¤° शोथ, शà¥à¤µà¤¸à¤¨à¤¿à¤•ा शोथ, निमोनिया, तपेदिक, क़मि परजीवी से होने वाली खॉंसी, दमा।
* तà¥à¤µà¤šà¤¾
छाले, संकà¥à¤°à¤®à¤£ वाले घाव, à¤à¤•à¥à¤œà¤¼à¥€à¤®à¤¾, जूंà¤à¤‚, पामा (सà¥à¤•ैबीज़), ददà¥à¤°à¥ कृमि।
* आà¤à¤–े
दà¥à¤–ती आà¤à¤–, कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में अलà¥à¤¸à¤°, रतौंधी, देखने में मà¥à¤¶à¥à¤•िल और कानापन।
* कान
बाहरी कान का संकà¥à¤°à¤®à¤£, बाहरी कान में फंफूद, कान में मोम जमना, मधà¥à¤¯à¤•रà¥à¤£ का संकà¥à¤°à¤®à¤£ और बहरापन।
* तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤°
मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤•ावरण शोथ, मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• शोथ, टिटेनस, पोलियो, मिरà¥à¤—ी और मानसिक रूप से अविकसित होना। दिल और संचरण: जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ गड़बड़ियॉं और वालà¥à¤µ की बीमारियॉं।
* कंकाल तंतà¥à¤°
पैरों के आकार में गड़बड़ी, अनà¥à¤¯ हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और जोड़ों के आकार में गड़बड़ियॉं, रिकेटस, हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का संकà¥à¤°à¤®à¤£, कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ के कारण पेशियों का खतम हो जाना, पेशीविकृति।
* खून
दातà¥à¤° कोशिका अनीमिया, लोहे की कमी से अनीमिया, मलेरिया, कैंसर और रकà¥à¤¤ सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤µ संबंधित गड़बड़ियॉं।
* लसिका तंत
फाइलेरिया रोग, कैंसर, गले में गांठें और वायरस से होने वाली गांठें।
* हारमोन
मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ (डायबटीज़), घेंघा रोग और वृदà¥à¤§à¤¿ में अवरोध।
* मूतà¥à¤° तंतà¥à¤°
गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ का शोथ (वृकà¥à¤• शोथ), अपवृकà¥à¤•ीय संलकà¥à¤·à¤£, मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ में संकà¥à¤°à¤®à¤£, मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— शोथ, पथरी और पेशाब रà¥à¤• जाना।
* पà¥à¤°à¥à¤· जनन तंतà¥à¤°
वृषण का पूरी तरह से नीचे न आना, वृषण का विकसित न होना और निरà¥à¤¦à¥à¤§à¤ªà¥à¤°à¤•ाश।
* महिला जनन अंग
कम विकसित डिंबगà¥à¤°à¤‚थि या गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯à¥¤
* अनà¥à¤¯ बीमारियॉं
खसरा, रूबैला, छोटी माता, कनफेड़, कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£, समय से पहले जनà¥à¤®, जनà¥à¤® के समय वजन कम होना।
* दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾à¤à¤‚
चोट, जलना, किसी कीड़े आदि दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ काट लिया जाना, डूब जाना, बिजली का à¤à¤Ÿà¤•ा, कान या नाक में कोई बाहरी चीज़ का चला जाना या ज़हर अंदर चला जाना। यह सूची केवल à¤à¤• मोटी समठबनाने के लिठहै। आप बहà¥à¤¤ सारी बीमारियों के बारे में अनà¥à¤¯ अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ में पढेंगे। इस अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ में केवल कà¥à¤› खास बीमारियों के बारे में ही बात की गई है। बचपन में पाचन तंतà¥à¤°, शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° और तà¥à¤µà¤šà¤¾ की बीमारियॉं सबसे अधिक होती हैं। शरीर में कीड़े होने से à¤à¥€ कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ बढ़ता है। बीमारी के लिठदवा दे देना ही काफी नहीं होता। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठऔर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मौत से बचाने के लिठहमें बीमारियों से बचाव और शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में ही इलाज पर à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना चाहिà¤à¥¤ पोषण, सफाई और टीकाकरण बहà¥à¤¤ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ होते हैं।
बचपन में होने वाला निमोनिया
निमोनिया से फेफड़े के ऊतकों पर असर होता है। इसका कारण आमतौर पर बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से होने वाला संकà¥à¤°à¤®à¤£ होता है। वायरस से संकà¥à¤°à¤®à¤£ बहà¥à¤¤ कम होता है। संकà¥à¤°à¤®à¤£ हवा से होता है। निमोनिया में फेफड़ों के किसी à¤à¤¾à¤— में शोथ हो जाता है। इससे बचà¥à¤šà¤¾ तेज़ तेज़ सांस लेने लगता है। शोथ से खॉंसी, बà¥à¤–ार और अनà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ जैसे à¤à¥‚ख मरना, उलà¥à¤Ÿà¥€ और बहà¥à¤¤ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कमज़ोरी हो जाती है। सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ बचà¥à¤šà¥‡ को निमोनिया आमतौर पर नहीं होता। आमतौर पर कोई और बीमारी होने पर जब शरीर की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कमज़ोर पड़ गई होती है तक निमोनिया हो जाता है। खसरे या किसी और शà¥à¤µà¤¸à¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° की किसी वायरस से होने वाली बीमारी से ठीक हो रहे बचà¥à¤šà¥‡, कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤¿à¤¤ बचà¥à¤šà¥‡, समय से पहले पैदा हà¥à¤ बचà¥à¤šà¥‡ और कम वजन वाले बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के निमोनिया के शिकार होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ अधिक होती है। विशिषà¥à¤Ÿ बचाव संà¤à¤µ नहीं है।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में बाल नà¥à¤¯à¥‚मोनिया à¤à¤• गंà¤à¥€à¤° बीमारी है| पॉंच साल से कम उमà¥à¤° किसी à¤à¥€ बालक को यह बीमारी कà¤à¥€ à¤à¥€ हो सकती है| बà¥à¤–ार, खॉंसी और सॉंस तेजीसे चलना ये लकà¥à¤·à¤£ होनेपर इसे नà¥à¤¯à¥‚मोनिया समà¤à¤¨à¤¾ चाहिये| बाल-नà¥à¤¯à¥‚मोनिया अकà¥à¤¸à¤° जिवाणॠया कà¤à¥€ कà¤à¥€ विषाणॠसे होता है| यह बीमारी गंà¤à¥€à¤° होते हà¥à¤ à¤à¥€ पहचानने और इलाज के लिये सरल है| अधिक जटिल बिमारियों में असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤²à¤®à¥‡à¤‚ ही इलाज करवाना पडता है| अब हम इस बीमारी के बारेमें थोडी जानकारी लेंगे| बीमारी की शà¥à¤°à¥à¤µà¤¾à¤¤ बà¥à¤–ार, सरà¥à¤¦à¥€ खॉंसी से होती है| बचà¥à¤šà¥‡ का दम फà¥à¤²à¤¤à¤¾ है| बीमारी फेफडों में होती है| यह सब १-२ दिनोंमें होता है|
* रोगनिदान
बà¥à¤–ार, खॉंसी और तेज सांस ये तीन पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¤£ है| इसमें खॉंसी सीने की गहराई से आती है| गले से नहीं| खॉंसने की आवाज से ही यह पता चलता है| इसी को à¤à¤¾à¤°à¥€ खॉंसी à¤à¥€ कहते है| शà¥à¤°à¥ में १-२ दिन हलà¥à¤•ा-मधà¥à¤¯à¤® बà¥à¤–ार रहता है| बà¥à¤–ार निरंतर रहता है|
बचà¥à¤šà¥‡à¤•ी सॉंस की गती गिनकर हम सही निरà¥à¤£à¤¯ ले सकते है| इसके लिये घडी या मोबाईल फोन के टायमर का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करे| à¤à¤• मिनिट तक सॉंसे गिने| इसके लिये बचà¥à¤šà¥‡ के कमर तक कपडे उतारकर देखना पडता है| बचà¥à¤šà¥‡ को मॉं की गोद में या खटिया पर लेटाये| सॉंसे गिनने के लिये सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¥à¤¾à¤¸à¥à¤•ोप की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं होती| छ: महिने से कम उमà¥à¤° शिशॠके लिये ६० से अधिक शà¥à¤µà¤¸à¤¨ को तेज शà¥à¤µà¤¸à¤¨ कहा जा सकता है| छ: महिने से २ वरà¥à¤· उमà¥à¤°à¤•े बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिये ५० से अधिक शà¥à¤µà¤¸à¤¨ की गति याने दम à¤à¤°à¤¨à¤¾ है| वैसेही २ वरà¥à¤· से उपर के बालकों के लिये ४० से अधिक शà¥à¤µà¤¸à¤¨à¤¦à¤° हो तो तेज शà¥à¤µà¤¸à¤¨ कहते है| तेज शà¥à¤µà¤¸à¤¨ से बचà¥à¤šà¥‡ के नथà¥à¤¨à¥‡à¤‚ फूल जाते है|
* खतरे के लकà¥à¤·à¤£
खॉंसी, बà¥à¤–ार व जलà¥à¤¦ शà¥à¤µà¤¸à¤¨ के अलावा निमà¥à¤¨ लकà¥à¤·à¤£ गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ के सूचक है|
बà¥à¤–ार से दौरे पडते है|
बचà¥à¤šà¤¾ खाने-पिने को राजी नहीं होता| सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨à¤à¥€ नहीं करता|
बचà¥à¤šà¤¾ सà¥à¤¸à¥à¤¤ हो जाता है| जादा देर जागता नहीं है|
सॉंस लेते समय बचà¥à¤šà¥‡ की पसलियॉं अंदर खींचती है|
सॉंस लेते समय सीने से कराहने की तथा सींटी जैसी आवाज आती है|
तà¥à¤µà¤šà¤¾, होंठ, नाखून व चेहरे पर नीली सी à¤à¤²à¤• दिखती है| इनमे से किसीà¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ के दिखते ही तà¥à¤°à¤‚त वैदà¥à¤¯à¤•ीय सहायता लेना चाहिये|
* पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• उपचार
नà¥à¤¯à¥‚मोनिया है लेकिन गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£ नहीं, à¤à¤¸à¥‡ में बचà¥à¤šà¥‡ को पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• उपचार काफी है| इसके लिये तीन सामानà¥à¤¯ तथा ससà¥à¤¤à¥€ दवाईयॉं है| à¤à¤®à¥‰à¤•à¥à¤¸à¤¿à¤¸à¤¿à¤²à¥€à¤¨ यह जिवाणà¥à¤“ं के लिये, पॅरासिटामॉल बà¥à¤–ार हेतू तथा शà¥à¤µà¤¾à¤¸ नलिका खà¥à¤²à¤¨à¥‡ हेतू कोई दवा| छोटे शिशà¥à¤“ं के लिये ये दवाइयॉं दà¥à¤°à¤µ सà¥à¤µà¤°à¥‚प में मिलती है| थोडे बडे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिये पिघलनेवाली गोलियॉं चल सकती है| ये उपचार कोई सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ करà¥à¤®à¤šà¤¾à¤°à¥€ à¤à¥€ कर सकता है| किनà¥à¤¤à¥ उपचार के १-२ दिन बाद डॉकà¥à¤Ÿà¤° से मिलना ठीक होगा| बà¥à¤–ार उतरने के लिये गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी में कपडा à¤à¤¿à¤—ोकर शरीर पोंछ ले| पूरा शरीर पोंछ ले| सिरà¥à¤« माथा नहीं| बचà¥à¤šà¥‡ का खान-पान चालू रखने की कोशिश करे|
* विशेष सूचना
यह बीमारी गंà¤à¥€à¤° जरà¥à¤° है लेकिन इसमें इंजेकà¥à¤¶à¤¨ या सलाईन की आवशà¥à¤¯à¤•ता नही होती|
खतरे के लकà¥à¤·à¤£ दिखते ही तà¥à¤°à¤‚त असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² ले जाà¤|
इस बीमारी से बचà¥à¤šà¥‡ का पेट उडना कहते है| लेकिन यह बीमारी फेंफडों में होती है|
दो दिनों के इलाज से जादातर बचà¥à¤šà¥‡ पूरà¥à¤£à¤¤: ठीक हो जाते है|
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में दसà¥à¤¤
बहà¥à¤¤ से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दसà¥à¤¤ की बीमारी हो जाती है| पतले दसà¥à¤¤ होते रहना, रकà¥à¤¤à¤®à¤¿à¤¶à¥à¤°à¤¿à¤¤ शà¥à¤²à¥‡à¤·à¥à¤®à¤¾ (आंव) गिरना à¤à¤• अलग बीमारी है| दसà¥à¤¤ रोग से गà¥à¤°à¤¸à¥€à¤¤ बचà¥à¤š का शरीर शà¥à¤·à¥à¤• हो जाता है| इससे इन बचà¥à¤šà¥‹ की मृतà¥à¤¯à¥‚ हो सकती है| दसà¥à¤¤ केजीवाणॠया विषाणू दूषित हाथों या à¤à¥‹à¤œà¤¨-पानी के साथ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पेट में पहà¥à¤à¤šà¤¤à¥‡ है| इकोलाय जीवाणॠतथा रोटावà¥à¤¹à¤¾à¤¯à¤°à¤¸ दोनो विषाणू के जरिये दसà¥à¤¤ होता है| दसà¥à¤¤ में घरेलू इलाज से à¤à¥€ हम खतरा और मृतà¥à¤¯à¥‚ टाल सकते है| कà¤à¥€ कà¤à¥€ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤²à¤®à¥‡à¤‚ इलाज करवाना पडता है|
* कारण
ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° तरह के दसà¥à¤¤ (सà¤à¥€ नहीं) संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण होते हैं। संकà¥à¤°à¤®à¤£ वाले दसà¥à¤¤ के आधे मामले वायरस से हà¥à¤ संकà¥à¤°à¤®à¤£ के होते हैं। पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥€à¤µà¤¾à¤£à¥ दवाओं से वायरस से होने वाली बीमारियॉं ठीक नहीं होतीं। वायरस के अलावा कà¥à¤› बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, अमीबा, जिआरà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ और कृमि से à¤à¥€ दसà¥à¤¤ होते हैं। | इकोलाय जिवाणू तथा रोटावà¥à¤¹à¤¾à¤¯à¤°à¤¸ दोनो विषाणू दोनो विषाणू के जरिये अतिसार होता है|
फेफड़ों, कानों के संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ और मलेरिया से à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में दसà¥à¤¤ हो जाते हैं। कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ से शरीर का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ तंतà¥à¤° कमज़ोर पड़ जाता है। à¤à¤¸à¥‡ में à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ को दसà¥à¤¤ लगने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। दसà¥à¤¤ जीवाणà¥à¤“ं के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के अलावा अनà¥à¤¯ कारणों से à¤à¥€ लग सकते हैं। जैसे दांत निकलने के समय, खाने से होने वाली à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से या फिर अपच से।
* दसà¥à¤¤ और निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण
अगर 24 घंटों में तीन या तीन से ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पतली पानीयà¥à¤•à¥à¤¤ टटà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‰à¤‚ हों तो यह दसà¥à¤¤ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है। अगर इसके साथ खून और शà¥à¤²à¥‡à¤·à¥à¤®à¤¾ à¤à¥€ आठतो यह पेचिश होती है। दसà¥à¤¤ से किसी à¤à¥€ और बीमारी की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में अधिक बचà¥à¤šà¥‡ मरते हैं। इससे कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ और वृदà¥à¤§à¤¿ में अवरोध à¤à¥€ हो जाता है।
दसà¥à¤¤ होने पर असल में दसà¥à¤¤ से हà¥à¤ निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण (शरीर में से पानी निकल जाना) से बचà¥à¤šà¥‡ की मौत होती है। इसलिठनिरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण और मौत से बचाने के लिठघर में बने घोलों से पानी की कमी पूरी करने की कोशिश करनी चाहिà¤à¥¤ दिनà¤à¤° में तीन से अधिक बार पतले दसà¥à¤¤ होना इसको हम बीमारी कह सकते है| लेकिन शà¥à¤·à¥à¤•ता यानी पानी की कमी की जॉंच आवशà¥à¤¯à¤• है| इसके लिये पà¥à¤¯à¤¾à¤¸, सतरà¥à¤•ता, तà¥à¤µà¤šà¤¾, आà¤à¤–े और जीठका सूखापन तथा पेशाब की मातà¥à¤°à¤¾ आदि बाते जॉंचे हो| इसमे शà¥à¤·à¥à¤•ता के इस पà¥à¤°à¤•ार तय होते है|
शà¥à¤·à¥à¤•ता में बचà¥à¤šà¥‡ को पà¥à¤¯à¤¾à¤¸, आà¤à¤–े दसी (डà¥à¤¬à¤¤à¥‡ हà¥à¤…े सूरज की तरह ) हà¥à¤ˆ, जीठसूख जाना, आदि लकà¥à¤·à¤£ होते है| à¤à¤¸à¥‡ में बचà¥à¤šà¤¾ रोतला और चिडचिडा हो जाता है| तà¥à¤µà¤šà¤¾ चà¥à¤Ÿà¤•ी में पकडकर छोडने पर सिलवटे धीरे धीरे समापà¥à¤¤ होती है| बचà¥à¤šà¤¾ रोये तो आà¤à¤–ों में पानी नहीं आता| तà¥à¤µà¤šà¤¾ का सूखापन जॉंचने हेतू बचà¥à¤šà¥‡ के पेट की तà¥à¤µà¤šà¤¾ अà¤à¤—à¥à¤²à¥€ की चिमटीमें पकडकर छोडिये| निरोगी अवसà¥à¤¥à¤¾ में तà¥à¤µà¤šà¤¾à¤•ी सिलवट पहले जैसी सपाट हो जाà¤à¤—ी| शà¥à¤·à¥à¤•ता होनेपर तà¥à¤µà¤šà¤¾ की सिलवटे धीरे धीरे ठीक होती है| निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण कितना हà¥à¤† है यह समà¤à¤¨à¤¾ उसके इलाज और संà¤à¤¾à¤²à¤¨à¥‡ के लिठज़रूरी है। नीचे दिठगठलकà¥à¤·à¤£ निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में नहीं दिखते :
* निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण नहीं है-अगर
बचà¥à¤šà¤¾ पà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¾ न हो।
जीठगीली हो।
बचà¥à¤šà¤¾ सामानà¥à¤¯ रूप से दà¥à¤°à¤µ पदारà¥à¤¥ पी पा रहा हो।
बचà¥à¤šà¥‡ की तà¥à¤µà¤šà¤¾ को मोड़ कर छोड़ने पर वो सिमटी हà¥à¤ˆ नहीं रहती।
करोटी अंतराल सामानà¥à¤¯ हो।
बचà¥à¤šà¤¾ सचेत हो। इस तरह के बचà¥à¤šà¥‡ में निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण नहीं हà¥à¤† है। उसे खूब सारे दà¥à¤°à¤µ पदारà¥à¤¥ देते रहें।
* हलà¥à¤•ा निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण
जब बचà¥à¤šà¥‡ में हलà¥à¤•ा निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण हो चà¥à¤•ा हो तो नीचे दिठगठलकà¥à¤·à¤£ दिखते हैं।
बचà¥à¤šà¤¾ बेचैन, चिड़चिड़ा और पà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¾ हो जाता है।
करोटी अंतराल धंस जाता है।
आà¤à¤–ें, अंदर धंस जाती हैं, मà¥à¤à¤¹ और जीठसूख जाती है।
तà¥à¤µà¤šà¤¾ को मोड़ कर छोड़ने पर वो धीरे धीरे सामानà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में वापस आती है। à¤à¤¸à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ को मà¥à¤à¤¹ से खूब सारा दà¥à¤°à¤µ पदारà¥à¤¥ दिठजाने की ज़रूरत होती है। इसके अलावा नमक और चीनी का घोल या ओ.आर.à¤à¤¸. के दो पैकेट à¤à¥€ दें।
* गंà¤à¥€à¤° निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण
अगर बचà¥à¤šà¥‡ में गंà¤à¥€à¤° निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण हो गया है तो:
बचà¥à¤šà¤¾ उंनींदा हो जाà¤à¤—ा।
आà¤à¤–ें अंदर धंस जाà¤à¤‚गी और जीठबिलकà¥à¤² सूख जाà¤à¤—ी।
बचà¥à¤šà¤¾ कà¥à¤› à¤à¥€ पी नहीं सकेगा।
तà¥à¤µà¤šà¤¾ को मोड़ कर छोड़ने पर वो बहà¥à¤¤ देर में वापस सामानà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में आà¤à¤—ी।
जब वो रो रहा होगा तो à¤à¥€ आà¤à¤–ों में आà¤à¤¸à¥‚ नहीं आà¤à¤‚गे। तीवà¥à¤° शà¥à¤·à¥à¤•ता के लकà¥à¤·à¤£ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ बचà¥à¤šà¤¾ सà¥à¤¸à¥à¤¤ लगता है| शीघà¥à¤°à¤¤à¤¾ से जबाब नहीं देता| आà¤à¤–े छॉंसी दिखाई देती है| जबान बहà¥à¤¤ रà¥à¤–ी लगती है| तà¥à¤µà¤šà¤¾ की सिलवटे चà¥à¤Ÿà¤•ी छोडनेपर बहà¥à¤¤ धीरे से समापà¥à¤¤ होती है| बचà¥à¤šà¤¾ रोनेपर आà¤à¤–ों में पानी नही आता| पेशाब नही आती| यह खतरनाक अवसà¥à¤¥à¤¾ है| बचà¥à¤šà¥‡ को अंत: शिरा दà¥à¤°à¤µ दिया जाना चाहिà¤à¥¤ पर चिकितà¥à¤¸à¤¾ केनà¥à¤¦à¥à¤° ले जाते हà¥à¤ रासà¥à¤¤à¥‡ में ओ.आर.à¤à¤¸ देते रहें।
दसà¥à¤¤ का इलाज
डॉकà¥à¤Ÿà¤° के सलाहसे जीवाणà¥à¤°à¥‹à¤§à¤• दवाइयॉं लग सकती है|
* तीन महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ बिंदू
दसà¥à¤¤ में बचà¥à¤šà¥‡ के इलाज के लिठतीन महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ बिंदू ये हैं :
यह तय करना कि पà¥à¤°à¤¤à¤¿ जीवाणॠदवा दी जाठया नहीं।
निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण ठीक करना
उपयà¥à¤•à¥à¤¤ आहार देते रहना किसी à¤à¥€ चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ जांच से यह पकà¥à¤•ी तरह से नहीं पता चल सकता कि दसà¥à¤¤ वायरस के कारण हà¥à¤† है या बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण। दसà¥à¤¤ के मामलों में से करीब आधे वायरस के संकà¥à¤°à¤®à¤£ से होते हैं और आधे बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के। परनà¥à¤¤à¥ कà¥à¤› महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ संकेत होते हैं। अगर आपको नीचे दिठगठलकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में से कोई à¤à¥€ दिखाई दें तो यह बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से होने वाले दसà¥à¤¤ के सूचक हैं।
मल में खून होना
बà¥à¤–ार
पेट में दरà¥à¤¦
टटà¥à¤Ÿà¥€ में से गंदी बदबू आना बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से होने वाले दसà¥à¤¤ में कोटà¥à¤°à¥€à¤®à¥‹à¤•à¥à¤¸à¤¾à¤œà¤¼à¥‹à¤² नामक पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥€à¤µà¤¾à¤£à¥ दवा से फायदा होता है। याद रहे कि अगर खूब सारी पानी जैसी टटà¥à¤Ÿà¥€ आठजिसके साथ और कोई à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ न दिखाई दें तो यह आमतौर पर वायरस वाले दसà¥à¤¤ होते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में कोई à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥€à¤µà¤¾à¤£à¥ दवाओं की ज़रूरत नहीं होती। इस तरह के दसà¥à¤¤ 3 से 5 दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। धैरà¥à¤¯ रख कर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखते रहना और शरीर में पानी की कमी को पूरा करना महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
बचà¥à¤šà¥‡ को अतिसार होने पर शà¥à¤·à¥à¤•ता हो या नहीं, लेकिन उसे दà¥à¤°à¤µà¤ªà¤¦à¤¾à¤°à¥à¤¥ मà¥à¤à¤¹ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¥‡ दे| यह आप सà¥à¤µà¤¯à¤‚ कर सकते है| दà¥à¤°à¤µ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚से बचà¥à¤šà¥‡ में रोग-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•ारक शकà¥à¤¤à¥€ आती है| अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° या सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯à¤¸à¥‡à¤µà¤• को इसकी जानकारी अवशà¥à¤¯ दे|
दसà¥à¤¤ हो किनà¥à¤¤à¥ शà¥à¤·à¥à¤•ता ना हो या कम हो तो घरेलू इलाज कर सकते है| परंतॠअतिशà¥à¤·à¥à¤•ता हो तब घर में रà¥à¤•े बिना तà¥à¤°à¤‚त असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² पहà¥à¤à¤šà¥‡|
* निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण ठीक करना
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के दसà¥à¤¤ में शरीर में पानी की कमी पूरी करना सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ इलाज है। अगर निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण बहà¥à¤¤ गंà¤à¥€à¤° न हो तो आप बचà¥à¤šà¥‡ को घर में बने घोल दे कर ही उसके शरीर में पानी की कमी की आपूरà¥à¤¤à¥€ कर सकते हैं। ये घोल ओ आर à¤à¤¸ à¤à¥€ हो सकता है और चीनी या नमक का घोल à¤à¥€à¥¤
मà¥à¤à¤¹ से निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण के उपचार जिसे ओरल रिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ थेरैपी (ओ आर टी) à¤à¥€ कहते हैं का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– नियम यह है कि जिस बचà¥à¤šà¥‡ को दसà¥à¤¤ हो रहे हों उसे सामानà¥à¤¯ से ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ तरल दिया जाना चाहिà¤à¥¤à¤“ आर टी के कई रूप होते हैं। ओ आर टी का मतलब है मà¥à¤à¤¹ से तरल देना जिससे निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण रोका जा सके या उसे ठीक किया जा सके। तरल पदारà¥à¤¥ या तो घरों में मिलने वाले कोई à¤à¥€ पीने की चीज़ें हो सकते हैं या बाज़ार में पैकेटों में मिलने वाले ओरल रिहाईडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ सालà¥à¤Ÿ (ओ आर à¤à¤¸) को पानी में मिला कर तैयार किया हà¥à¤† तरल पदारà¥à¤¥à¥¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के हिसाब से ओ आर टी में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² हो सकने वाले विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ तरलपपदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ की सूची नीचे दी गई है।
* घर के तरल पदारà¥à¤¥
निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण रोकने के लिठदसà¥à¤¤ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में अतिरिकà¥à¤¤ तरल पदारà¥à¤¥ देना ज़रूरी होता है। तरल पदारà¥à¤¥ और आहार दोनों ही महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ होते हैं। जब दसà¥à¤¤ शà¥à¤°à¥ हों या चल रहे हों तो उस समय सामानà¥à¤¯ से अधिक तरल पदारà¥à¤¥ दिठजाने चाहिठऔर दूध à¤à¥€ पिलाते रहना चाहिà¤à¥¤ अगर ये पदारà¥à¤¥ शà¥à¤°à¥ में और सही तरह से दिठजाà¤à¤‚ तो दसà¥à¤¤ के गंà¤à¥€à¤° मामलों में से केवल 10 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ में सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾ की मदद की ज़रूरत पड़ेगी। तरल पदारà¥à¤¥ जिनमें नमक और या रà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾à¤š या चीनी और पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ हो वो अचà¥à¤›à¥‡ रहते हैं। à¤à¤¸à¥‡ पदारà¥à¤¥ शरीर में दà¥à¤°à¤µ और लवणों दोनों की कमी पूरी करते हैं। इनके अचà¥à¤›à¥‡ उदाहरण हैं सूप जिनमें नमक पड़ा हो, नमकीन चावल का पानी, नमकीन मठा या मकà¥à¤•ी का सूप आदि।इसके अलावा बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को खूब सारे à¤à¤¸à¥‡ तरल पदारà¥à¤¥ à¤à¥€ दिठजाने चाहिठजिनमें नमक न हो जैसे पीने का सादा पानी, नारियल का पानी, चाय, फलों का ताज़ा रस जिसमें चीनी न मिली हो। à¤à¤¸à¥‡ तरल पदारà¥à¤¥ न दें जिनमें चीनी हो जैसे कॉफी या कोलà¥à¤¡ डिंकà¥à¤¸à¥¤à¤…गर बचà¥à¤šà¤¾ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ पर हो तो ज़रूरी है कि सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ जारी रखा जाà¤à¥¤
* ओ आर à¤à¤¸ घोल
ओ आर à¤à¤¸ घोल दिठजाने की सिफारिश निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण के उपचार के लिठविशà¥à¤µ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संगठन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ की गई है। जहॉं à¤à¥€ समà¥à¤à¤µ हो वहॉं घर में निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण से बचाव के लिठयह दिया जाना चाहिà¤à¥¤ ओ आर à¤à¤¸ के पैकेट में गà¥à¤²à¥‚कोस और नमक होता है। और जब इसे पानी में घोला जाता है तो यह निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण रोकने या उसके उपचार के लिठबेहद उपयोगी रहता है।
ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° ओ आर à¤à¤¸ पैकेटों को à¤à¤• लिटर पानी में घोला जाना होता है। जिन पैकेटों में टà¥à¤°à¤¾à¤ˆà¤¸à¥‹à¤¡à¤¿à¤¯à¤® सिटà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ की जगह सोडियम बाइकारà¥à¤¬à¥‹à¤¨à¥‡à¤Ÿ होता है (2.5 गà¥à¤°à¤¾à¤®) वो à¤à¥€ ठीक रहते हैं। परनà¥à¤¤à¥ इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय तक रख पाना संà¤à¤µ नहीं होता। बाज़ार में मिलने वाले बहà¥à¤¤ से पैकेटों में लवणों का अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤ उतना नहीं होता जितना की मानà¥à¤¯ है। किनà¥à¤¹à¥€à¤‚ में बहà¥à¤¤ अधिक चीनी होती है। किनà¥à¤¹à¥€à¤‚ अनà¥à¤¯ में बहà¥à¤¤ कम नमक होता है। सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥ कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾ को सिरà¥à¤« उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ पैकेटों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना चाहिठजिनमें ऊपर दिठगई मातà¥à¤°à¤¾à¤“ं में सà¤à¥€ चीज़ें मौजूद हों।
* चीनी और नमक का घोल
ओ आर à¤à¤¸ की जगह घर में चीनी और नमक का घोल बना कर इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है। यह घोल 5 गà¥à¤°à¤¾à¤® नमक (5 मिली लीटर का à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š) और 20 गà¥à¤°à¤¾à¤® चीनी (5 मिली लीटर के चार चमà¥à¤®à¤š) à¤à¤• लिटर पानी में डाल कर बनाया जाता है।
बालकदमा (बचपन में दमा)
आपके बचà¥à¤šà¥‡ को बारबार खांसी और हॉंफने की शिकायत हो लेकिन बà¥à¤–ार ना हो तो समà¤à¥€à¤¯à¥‡ कि उसे बालदकमा है| बालकदमा १-५साल की उमà¥à¤°à¤¤à¤• हो सकता है| बालकदमा लंबे समयतक चलने और कम-अधिक होनेवाली बीमारी है| इसके लिये हमेशाके लिये नही लेकिन तातà¥à¤•ालिक उपाय है| माता-पिताको इस बीमारी व इसके इलाजकी सही जानकारी होनी चाहिये| तांकि वे बेकारकी चिनà¥à¤¤à¤¾, आशा-निराशा, डर तथा डॉकà¥à¤Ÿà¤° बदलने जैसी बातोंसे दूर रहे|
* बालकदमा की वजह
अनà¥à¤µà¤‚शिकता और à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€à¤•े संयà¥à¤•à¥à¤¤ कारणोंसे बालकदमा होता है| वायूपà¥à¤°à¤¦à¥‚षण से à¤à¥€ बालकदमा उà¤à¤°à¤¤à¤¾ है| विषाणà¥à¤œà¤¨à¤¿à¤¤ सरà¥à¤¦à¥€-बà¥à¤–ारसे à¤à¥€ बालकदमा शà¥à¤°à¥‚ हो सकता है| बारीश या ठणà¥à¤¡à¥‡ मौसममें बालकदमा अधिक होता है|
* रोगनिदान लकà¥à¤·à¤£ व चिनà¥à¤¹
बचà¥à¤šà¥‡à¤•ो सरà¥à¤¦à¥€, छिंकोंकी तकलीफ शà¥à¤°à¥‚ होती है| इसके बाद सांस लेना मà¥à¤¶à¥à¤•ील होता है| सीनेमें आवाज आने लगती है|
सांसे उथली और तेज चलती है| नाक फूलने लगती है| बचà¥à¤šà¤¾ बडा हो तो छाती à¤à¤°à¤¨à¥‡à¤•ी शिकायत करता है|
सांस छोडते हà¥à¤ सींटी जैसी आवाज आती है|
बालकदमा बीच-बीचमें उà¤à¤°à¤¤à¤¾ है| लेकिन इस बीच बचà¥à¤šà¥‡à¤•ी तबीयत ठीक रहती है|
कम उमà¥à¤° के बचà¥à¤šà¥‡ दमेकी तकलीफसे रोते है|
हॉंफनेसे पेट उपर-निचे होता है| तीवà¥à¤° बीमारीके चलते होठों, हाथोंकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ नीलीसी दिखती है|
नà¥à¤¯à¥‚मोनियाकी तरह बालकदमा में शà¥à¤°à¥‚ से बà¥à¤–ार नही होता| लेकिन २-३ दिनों बाद बà¥à¤–ार हो सकता है|
* इलाज
पहली बार दमा होने पर बचà¥à¤šà¥‡ को तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¤•े पास ले जाà¤à¤| डॉकà¥à¤Ÿà¤° तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ उपचार करके घर लेनेके लिये दवाई देंगे| सामानà¥à¤¯à¤¤: बालकदमें में इंजेकà¥à¤¶à¤¨ या सलाईनकी आवशà¥à¤¯à¤•ता नही होती| शà¥à¤µà¤¸à¤¨à¤®à¤¾à¤°à¥à¤—से दवाई सही सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर पहà¥à¤à¤šà¤¤à¥€ है| डॉकà¥à¤Ÿà¤° मà¥à¤à¤¹à¤¸à¥‡ लेनेकी दवाईयॉं देते है, जिसे शà¥à¤µà¤¸à¤¨à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— खà¥à¤²à¤¾ रखने में सहायता होती है| तातà¥à¤•ालिक उपचारोंमें तीन पà¥à¤°à¤•ारकी दवाइयॉं है|
सौ डोसके फवà¥à¤µà¤¾à¤°à¥‡à¤µà¤¾à¤²à¤¾ सà¥à¤ªà¥à¤°à¥‡| इसमे से हरबार तयशà¥à¤¦à¤¾ (निशà¥à¤šà¤¿à¤¤) मातà¥à¤°à¤¾à¤®à¥‡à¤‚ दवाई निकलती है| फवà¥à¤µà¤¾à¤°à¥‡à¤•ा खटका दबाना और सांस लेना à¤à¤•साथ करना पडता है| बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिये यह कठीन है| अत: सà¥à¤ªà¥‡à¤¸à¤°à¤•ा उपयोग किया जाता है| आपके डॉकà¥à¤Ÿà¤° इन विषयमें आपको बतायेंगे| इस दवाका उपयोग घरमें à¤à¥€ कर सकते है|
रोटाहेलरमें दवाईके केपसà¥à¤² में पावडर होती है| यह पà¥à¤°à¤•ार अधिक ससà¥à¤¤à¤¾ पडता है|
असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में नेबà¥à¤¯à¥à¤²à¤¾à¤¯à¤à¤° का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करते है| घरमें उपचार लेना हो तो डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¤•ो सूचित करना ठीक रहेगा|
* कà¥à¤› पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤£
बालकदमा किस ततà¥à¤¤à¥à¤µà¥‹à¤‚ के परीकà¥à¤·à¤£ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€à¤¸à¥‡ हà¥à¤† है इसके शोध हेतॠपरीकà¥à¤·à¤£ करते है| छातीका कà¥à¤·à¤¯à¤°à¥‹à¤— है या नही देखने के लिये छातीका à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¥‡ आवशà¥à¤¯à¤• है| बालकदमा ५ वरà¥à¤·à¥‹à¤ªà¤°à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤à¥€ रहा हो तो फेफडोंका कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ परिकà¥à¤·à¤£ करना पडता है| इसकेलिठपी.à¤à¤«. टेसà¥à¤Ÿ करते है|
* पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤‚ध
ऋतà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° बालकदमा कम-अधिक हो सकता है| अत: शीत या वरà¥à¤·à¤¾à¤•ाल में धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखे गरम कपडों का उपयोग अचà¥à¤›à¤¾ है| à¤à¤¸à¥‡ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सरà¥à¤¦à¥€ बà¥à¤–ार वाले वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से दूर रखे| à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€à¤•े कारणों का पता लगने से बालकदमा टाला जा सकता है| वायूपà¥à¤°à¤¦à¥‚षण से बालकदमा बढ रहा है| धूल पà¥à¤°à¤¦à¥‚षण से à¤à¤¸à¥‡ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बचाना चाहिये| बालदमें के लकà¥à¤·à¤£, चिनà¥à¤¹ दिखतेही डाकà¥à¤Ÿà¤° से मिले| अपने बचà¥à¤šà¥‡ की बीमारी की जानकारी बालवाडी शिकà¥à¤·à¤¿à¤•ा को दे| साथही पà¥à¤°à¤¥à¤®à¥‹à¤ªà¤šà¤¾à¤° की दवाईयॉं और अपना फोन नंबर दे|
पाà¤à¤š सालकी उमà¥à¤°à¤•े बाद बालकदमा अकà¥à¤¸à¤° बंद हो जाता है| लेकिन कà¥à¤›à¤•ो बादमेंà¤à¥€ दमा शà¥à¤°à¥‚ रहता है| शà¥à¤µà¤¸à¤¨à¥‹à¤ªà¤šà¤¾à¤° अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ अलग-अलग सरल पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सिखाà¤| गà¥à¤¬à¥à¤¬à¤¾à¤°à¤¾ फà¥à¤²à¤¾à¤¨à¥‡à¤•ा वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® à¤à¥€ अचà¥à¤›à¤¾ है| बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को उनके खेल खेलने दिजिये| खेलने से शà¥à¤µà¤¸à¤¨à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— खà¥à¤²à¤¾ और निरोगी रहता है| लेकिन साथवाली बॅग में दवाइयॉं रखनी चाहिये| कईं विशà¥à¤µà¤¸à¥à¤¤à¤° के खिलाडी दमा होने पर à¤à¥€ सफल रहे है| बालकदमा के लिये à¤à¥‹à¤²à¤¾ छाप डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ की सलाह, उपचार नही ले| ये लोग अकà¥à¤¸à¤° सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤‡à¤¡ दवाइयों का गलत उपयोग करते है|
* कनफेड़
कनफेड़ हवा में मौजूद वायरस से होने वाली बीमारी है जो 5 - 6 साल के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पकड़ती है। इस उमà¥à¤° में कनफेड़ आमतौर पर नà¥à¤•सानदेह नहीं होता। इसमें गालों के पीछे की ओर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ लार गà¥à¤°à¤‚थियों में सूजन हो जाती है जिनमें दबाने से दरà¥à¤¦ à¤à¥€ होता है। à¤à¤• बार संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने पर जीवन à¤à¤° के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पैदा हो जाती है। अगर यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ बचपन में न हो तो यह कà¤à¥€ कà¤à¥€ बड़ी उमà¥à¤° में हो सकता है। वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤•ों में कनफेड़ से डिंबवाही गà¥à¤°à¤‚थियों या वृषण पर असर हो सकता है। इसलिठबड़ी उमà¥à¤° में होने वाला कनफेड़ खतरनाक होता है। कनफेड़ से होने वाले डिंबवाही गà¥à¤°à¤‚थियों या वृषण के शोथ से बनà¥à¤§à¥à¤¯à¤¤à¤¾ हो सकती है। सही उमà¥à¤° में इसका टीका लगा देना ही सबसे उपयोगी तरीका है। यह à¤à¤®.à¤à¤®.आर. टीके के रूप में मिलता है (यानि खसरे, कनफेड़ और रूबैला) के टीके के रूप में। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में कनफेड़ के इलाज के लिठपैरासिटेमॉल दी जाती है। इससे दरà¥à¤¦ और बà¥à¤–ार कम हो जाता है। वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤•ों को कनफेड़ होने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास à¤à¥‡à¤œà¤¾ जाना ही ठीक रहता है।
* अनाज वाले घोल
कई अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ से पता चला है कि ओ आर à¤à¤¸ घोल में 20 गà¥à¤°à¤¾à¤® गà¥à¤²à¥‚कोस की जगह 40 गà¥à¤°à¤¾à¤® पके हà¥à¤ चावल का पानी इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना बेहतर रहता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ आसानी से पच जाता है और इससे कम टटà¥à¤Ÿà¥€ आती है। मगर यह सिरà¥à¤« वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤•ों के लिठया हैजा के शिकार बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठठीक है। अगर किसी बचà¥à¤šà¥‡ को किसी à¤à¥€ और तरह के गंà¤à¥€à¤° दसà¥à¤¤ हों तो यह ठीक नहीं रहता।अनाज वाले तरल पदारà¥à¤¥ जैसे चावल का पानी निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण से बचाव के लिठउपयोगी घरेलू उपचार है। अगर उनमें नमक पड़ा हो तो वो काफी उपयोगी रहते हैं। जिन जगहों पर अनाज के दलिठका इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होता है वहॉं पर इनको सामानà¥à¤¯ आहार के रूप में देते रहना चाहिà¤à¥¤ दलिया देना बंद न करें। à¤à¤¸à¤¾ करने से बचà¥à¤šà¥‡ में कैलोरी की मातà¥à¤°à¤¾ पहà¥à¤à¤šà¤¨à¥€ कम हो जाà¤à¤—ी।
* मà¥à¤à¤¹ से पानी की कमी पूरी करने के दस नियम
ओ आर à¤à¤¸ के पैकेटों में चीनी और नमक का ठीक अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤ होता है। परनà¥à¤¤à¥ घर में बने घोलों को बनाना और इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना आसान होता है।
उलà¥à¤Ÿà¥€ होने पर à¤à¥€ ओ आर टी देना जारी रखें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि दसà¥à¤¤ के साथ अकसर अमाशà¥à¤¯ शोथ हो जाता है। और ओ आर à¤à¤¸ से इसको ठीक करने में मदद मिलती है। उलà¥à¤Ÿà¥€ अकसर अमाशà¥à¤¯ शोथ के कारण होती है।
जहॉं तक संà¤à¤µ हो साफ पानी का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें। इसे उबालने और ठंडा करने में समय बरà¥à¤¬à¤¾à¤¦ न करें। घर में उपलबà¥à¤§ आम पीने का पानी इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें।
à¤à¤• बार में 4 - 6 घंटों के लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ (करीब 200 मिली लीटर) ओ आर à¤à¤¸ बना के रख लें। इसके बाद फिर से ताज़ा ओ आर à¤à¤¸ बनाà¤à¤‚। à¤à¤¸à¤¾ करना इसलिठज़रूरी है ताकि देर तक रखने से घोल में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ न बॠजाà¤à¤‚।
ओ आर à¤à¤¸ चमà¥à¤®à¤š से धीरे धीरे पिलाà¤à¤‚ ताकि वो शरीर में अवशोषित हो जाà¤à¥¤ बहà¥à¤¤ सारा ओ आर à¤à¤¸ देने से उलà¥à¤Ÿà¥€ हो सकती है।
à¤à¤• साल से कम के बचà¥à¤šà¥‡ के लिठ24 घंटों में करीब à¤à¤• लिटर ओ आर टी काफी होता है। हलà¥à¤•े से बीच के निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण में पहले 4 घंटों में करीब 75 मिली लीटर ओ आर à¤à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿ किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® शरीर के वजन के हिसाब से दें।
हर बार की टटà¥à¤Ÿà¥€ में हà¥à¤ˆ पानी की कमी की à¤à¤°à¤ªà¤¾à¤ˆ के लिठ100 मिली लीटर ओ आर à¤à¤¸ दिया जाना चाहिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‡ को धैरà¥à¤¯ से और थोड़ा जरà¥à¤¬à¤¦à¤¸à¥à¤¤à¥€ तरल पदारà¥à¤¥ दें। दसà¥à¤¤ के कारण बचà¥à¤šà¤¾ चिड़चिड़ा हो जाता है। जब तक कि निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण के लकà¥à¤·à¤£ ठीक न हो जाà¤à¤‚ ओ आर à¤à¤¸ देते रहें।
à¤à¤• साल तक के बचà¥à¤šà¥‡ के लिठओ आर à¤à¤¸ को उतने ही पानी से हलà¥à¤•ा करेंं। नहीं तो बारी बारी से ओ आर à¤à¤¸ या सादा पानी बारी बारी से दें। ओ आर à¤à¤¸ का घोल थोड़ा ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नमकीन होता है और नवजात बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठहानिकारक होता है।
गंà¤à¥€à¤° निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण में अंत: शिरा दà¥à¤°à¤µ न दिठजाने से से मौत à¤à¥€ हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ में केवल ओ आर à¤à¤¸ काफी नहीं होता।ओ आर à¤à¤¸ से दसà¥à¤¤ नहीं रà¥à¤•ते। इससे केवल निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण रोका जा सकता है। अगर बचà¥à¤šà¤¾ ठीक से दूध पी रहा है, खेल रहा है और निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण ठीक होता जा रहा है तो मॉं को समà¤à¤¾à¤à¤‚ कि घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है।
* अधिक पानी
अधिक पानी होने से आà¤à¤–ें मोटी हो जाती हैं। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से देखें कि कहीं à¤à¤¸à¤¾ तो नहीं हो रहा है। और तब तक ओ आर à¤à¤¸ देना रोक दें जब तक यह चिनà¥à¤¹ गायब न हो जाà¤à¥¤ अगर बचà¥à¤šà¤¾ पेशाब न कर रहा हो तो इससे शरीर में पानी इकटà¥à¤ ा हो जाता है। अगर बचà¥à¤šà¤¾ ओ आर à¤à¤• न ले तो अंत: शिरा दà¥à¤°à¤µ या पेट में नली डाल कर आहार दिया जाना ज़रूरी हो सकता है। अगर आप को यह करना न आता हो तो बचà¥à¤šà¥‡ को तà¥à¤°à¤‚त पास के असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² ले जाà¤à¤‚।
* आहार देते रहना
दसà¥à¤¤ से होने वाली सबसे आम समसà¥à¤¯à¤¾ कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ की होती है। à¤à¥‡à¤¸à¤¾ इसलिठकà¥à¤¯à¥‹à¤•ि खाना आंत में इतनी देर नहीं रह पाता कि वो ठीक से अवशोषित हो सके। इसके अलावा दसà¥à¤¤ के डर से अकसर मांà¤à¤‚ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दूध पिलाना बंद कर देती हैं। इस समय में आसानी से पचने वाले तरल पदारà¥à¤¥ देते रहने चाहिà¤à¥¤ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ और ऊपर का दूध à¤à¥€ पिलाते रहना चाहिà¤à¥¤
* टटà¥à¤Ÿà¥€ रोकने की दवाà¤à¤‚ न दें
दसà¥à¤¤ में आंतों को निषà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯ करने या धीमा करने वाली दवाà¤à¤‚ देना नà¥à¤•सानदेह हो सकता है। à¤à¤• तो इससे मल इकटà¥à¤ ा हो जाता है जिसको बाहर फैंका जाना ज़रूरी होता है। पेट में à¤à¤‚ठन को ठीक करने वाली दवाओं (आंतों को धीमा करने वाली) के बहà¥à¤¤ अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में दिठजाने से पेट के आधमान की समसà¥à¤¯à¤¾ हो जाती है। à¤à¤¸à¤¾ आंतों के लकवे से होता है और इससे बचà¥à¤šà¥‡ की मौत à¤à¥€ हो सकती है।
* इनà¥à¤œà¥ˆà¤•à¥à¤¶à¤¨ न दें
ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° दसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ में इनà¥à¤œà¥ˆà¤•à¥à¤¶à¤¨ से कोई फायदा नहीं होता। उलà¥à¤Ÿà¤¾ अगर दसà¥à¤¤ पोलियो के वायरस से हà¥à¤† हो तो इनà¥à¤œà¥ˆà¤•à¥à¤¶à¤¨ से लकवा हो जाने का खतरा होता है। बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से होने वाली पेचिश के केवल कà¥à¤› मामलों में इनà¥à¤œà¥ˆà¤•à¥à¤¶à¤¨ देना ज़रूरी होता है। इसका फैसला डॉकà¥à¤Ÿà¤° को करने दें।
* आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° दसà¥à¤¤ में हलà¥à¤•ा आहार
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° दसà¥à¤¤ में हलà¥à¤•ा आहार देना चाहिये| अत: मूà¤à¤—, चावल, राजगीरा खिलाना अचà¥à¤›à¤¾ है| गाय के घी का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करे| इससे बालकको शकà¥à¤¤à¥€ आती है| खीर आसानी से हजम हो जाती है| इसमे खà¥à¤¬ सारा गà¥à¤¡ डालिये|
* पेचिश का इलाज
अगर मल में खून या शà¥à¤²à¥‡à¤·à¥à¤®à¤¾ हो तो यह पेचिश है और इसके इलाज के लिठपॉंच दिन तक कोटà¥à¤°à¥€à¤®à¥‹à¤•à¥à¤¸à¤¾à¥›à¥‹à¤² या नालिडिकà¥à¤¸à¤¿à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ दें।
* विशेष सूचना
विषाणू अतिसार में उलà¥à¤Ÿà¥€ और हलà¥à¤•ा बà¥à¤–ार हो सकता है| अत: इसकी चिंता न करे|
अतिसार में आहार की दृषà¥à¤Ÿà¥€ से सामानà¥à¤¯ शकà¥à¤•र की अपेकà¥à¤·à¤¾ गà¥à¤²à¥à¤•ोज-शकà¥à¤•र अधिक अचà¥à¤›à¥€ है|
घरेलू दà¥à¤°à¤µà¤ªà¤¦à¤¾à¤°à¥à¤¥ सलाईन से बिलकà¥à¤² कम नहीं होते| साथ ही ससà¥à¤¤à¥‡ à¤à¥€ होते है|
सलाईन याने सिरà¥à¤« पानी| तथा शकà¥à¤•र व नमक होता है| नस दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सलाईन की अपेकà¥à¤·à¤¾ मà¥à¤à¤¹à¤¸à¥‡ दà¥à¤°à¤µà¤ªà¤¦à¤¾à¤°à¥à¤¥ शीघà¥à¤° दे सकते है| अतिशà¥à¤·à¥à¤•ता होनेपर ही सलाईन की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है|
तà¥à¤µà¤šà¤¾ का सूखापन जॉंचने हेतू बचà¥à¤šà¥‡ के पेट की तà¥à¤µà¤šà¤¾ अà¤à¤—à¥à¤²à¥€ की चिमटीमें पकडकर छोडिये| निरोगी अवसà¥à¤¥à¤¾ में तà¥à¤µà¤šà¤¾à¤•ी सिलवट पहले जैसी सपाट हो जाà¤à¤—ी| शà¥à¤·à¥à¤•ता होनेपर तà¥à¤µà¤šà¤¾ की सिलवटे धीरे धीरे ठीक होती है|
उलà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‰à¤‚ होने पर à¤à¥€ १० मिनिट रà¥à¤•कर दà¥à¤°à¤µà¤ªà¤¦à¤¾à¤°à¥à¤¥ देते रहिये|
रकà¥à¤¤à¤¶à¥à¤²à¥‡à¤·à¥à¤®à¤¾ (आंव) हो तो जिवाणà¥à¤°à¥‹à¤§à¤• अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¥ˆà¤µà¤¿à¤• दवाइयॉं देनी पडती है|
दसà¥à¤¤ बडे हो या हर तीन घंटेमें à¤à¤• से अधिक दसà¥à¤¤ हो तो बिमारी की गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ को समà¤à¥‡| à¤à¤¸à¥‡ में असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² जाना ठीक रहेगा|
बचपन में होने वाला तपेदिक
शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° वाले अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ में आपको तपेदिक के बारे में और जानकारी मिलेगी। इसका à¤à¥€ जलà¥à¤¦à¥€ निदान किया जाना, चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ मदद हासिल करना और बाद में देखà¤à¤¾à¤² महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
* लकà¥à¤·à¤£
किसी बचà¥à¤šà¥‡ का वजन लगातार कम होता जाना (हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ महीनों के अंतराल में), या वजन न बढ़ना या उसका ठीक से खाना न खाना।
बचà¥à¤šà¥‡ का लगातार बीमार रहना ।
खॉंसी और छाती में से आवाज़ आना।
सामानà¥à¤¯ इलाज के बावजूद बà¥à¤–ार न जाना।
बचà¥à¤šà¥‡ का निमोनिया, काली खॉंसी या खसरे से न उबर पाना।
लसिका गà¥à¤°à¤‚थियों में दरà¥à¤¦ रहित सूजन।
आà¤à¤–ों का चिरकारी रूप से लाल रहना (अजलीय नेतà¥à¤°à¤¶à¥à¤²à¥‡à¤·à¥à¤®à¤¾ शोथ)
मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• आवरण शोथ - गरà¥à¤¦à¤¨ अकड़ना, बà¥à¤–ार, वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° में बदलाव।
कूलà¥à¤¹à¥‡ या पीठमें लगातार दरà¥à¤¦ रहना। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में तपेदिक होना à¤à¥€ उतना हीे आम है जितना कि बड़ों में। सतरà¥à¤• रहें और à¤à¤¸à¥‡ कोई à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ दिखने पर बचà¥à¤šà¥‡ को सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ केनà¥à¤¦à¥à¤° ले जाà¤à¤‚।
* खसरा
खसरा हवा में मौजूद वायरस से बचपन में होने वाला संकà¥à¤°à¤®à¤£ है। पà¥à¤°à¤®à¥à¤– रूप से इससे शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° पर असर पड़ता है पर तà¥à¤µà¤šà¤¾ और शà¥à¤²à¥‡à¤·à¥à¤®à¤¾ à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ पर à¤à¥€ चकतà¥à¤¤à¥‡ उà¤à¤° आते हैं। खसरे में आम जà¥à¤•ाम, खॉंसी, बà¥à¤–ार और साथ में चकतà¥à¤¤à¥‡ होते हैं। सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ बचà¥à¤šà¥‡ खसरे से बिना किसी जटिलता के उबर जाते हैं। परनà¥à¤¤à¥ कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤¿à¤¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ या फिर उन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में जिनकी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कमज़ोर है, खसरे से कई जरह की जटिलताà¤à¤‚ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है। कमज़ोर बचà¥à¤šà¥‡ खसरे से बीमार हो जाते हैं और कà¤à¥€ कà¤à¥€ मौत के शिकार à¤à¥€à¥¤ इसलिठटीका लगवाया जाना बहà¥à¤¤ ही महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
* खसरे का मौसम
खसरा आमतौर पर महारोग की तरह हर 2 या 3 साल बाद होता है। परनà¥à¤¤à¥ इसके अलावा बीच में à¤à¥€ खसरे के मामले देखने को मिल जाते हैं। आमतौर पर सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अंत में और गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‰à¤‚ शà¥à¤°à¥ होने के बीच खसरा होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। खसरे के टीके से इसकी बीमारी अब काफी कम दिखाई देती है|
* फैलना और विकृति विजà¥à¤žà¤¾à¤¨
संकà¥à¤°à¤®à¤£ फेफड़ों और खून तक पहà¥à¤à¤š जाता है। शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° के ऊपरी à¤à¤¾à¤— में हलà¥à¤•ा संकà¥à¤°à¤®à¤£ होता है। यह वो समय होता है जब चकतà¥à¤¤à¥‡ अà¤à¥€ उà¤à¤°à¥‡ नहीं होते, परनà¥à¤¤à¥ इस समय में संकà¥à¤°à¤®à¤£ à¤à¤• बचà¥à¤šà¥‡ से दूसरे में पहà¥à¤à¤š सकता है।
* लकà¥à¤·à¤£
वायरस के शरीर में पहà¥à¤à¤šà¤¨à¥‡ के करीब 8 से 10 दिनों के बाद ही चकतà¥à¤¤à¥‡ उà¤à¤°à¤¤à¥‡ हैं। चकतà¥à¤¤à¥‡ खून की सूकà¥à¤·à¥à¤® नलियों के आसपास में शोथ के कारण होते हैं। ये सारे असर कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤¿à¤¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गंà¤à¥€à¤° होते हैं। कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• शोथ हो जाने का खतरा à¤à¥€ होता है। चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ रूप में खसरे का सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ लकà¥à¤·à¤£ है चकतà¥à¤¤à¥‡ होना। परनà¥à¤¤à¥ गालों के अंदर सरसों जैसे सफेद चिनà¥à¤¹ à¤à¥€ खसरा होने का विशà¥à¤µà¤¸à¤¨à¥€à¤¯ सूचक हैं। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कोपलिक धबà¥à¤¬à¥‡ कहते हैं। यह खसरे का à¤à¤• खास लकà¥à¤·à¤£ है। कोपलिक धबà¥à¤¬à¥‡ 1 से 2 दिनों तक रहते हैं। आप मà¥à¤à¤¹ के अंदर इनकी जांच कर सकते हैं।
* बà¥à¤–ार और चकतà¥à¤¤à¥‡
बà¥à¤–ार 3 से 4 दिनों तक चलता है। बचà¥à¤šà¥‡ की नाक बहती है और आà¤à¤–ों में से पानी आता रहता है। उसके बाद कान के पीछे, चेहरे पर और फिर गरà¥à¤¦à¤¨, पेट, हाथ पैर पर चकतà¥à¤¤à¥‡ उà¤à¤°à¤¨à¥‡ लगते हैं। खसरे के चकतà¥à¤¤à¥‡ लाल रंग के होते हैं। चकतà¥à¤¤à¥‡ à¤à¤• दूसरे में मिल जाते हैं। इसके विपरीत छोटी माता में होने वाले चकतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ में पीप और दà¥à¤°à¤µ होता है। कà¤à¥€ कà¤à¥€ बीमारी चकतà¥à¤¤à¥‡ होने के बाद ठीक हो जाती है। चकतà¥à¤¤à¥‡ 3 - 4 दिनों तक रहते हैं और उसके बाद गायब हो जाते हैं और उनकी जगह पीले काले निशान रह जाते हैं। इन जगहों पर से तà¥à¤µà¤šà¤¾ निकल जाती हैं और कà¥à¤› दिनों तक निशान बने रहते हैं।
à¤à¥‚ख न लगना खसरे का à¤à¤• आम लकà¥à¤·à¤£ है। à¤à¥‚ख न लगने से कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ हो जाने का खतरा हो जाता है। कà¤à¥€ कà¤à¥€ हमें लसिका गà¥à¤°à¤‚थियों में सूजन (गिलà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‰à¤‚) दिखाई देती है। ठीक उसी तरह से जैसे कि कई और वायरस से होने वाली बीमारियों में होती है। अगर खसरे से कोई जटिलता न हो तो यह करीब à¤à¤• हफà¥à¤¤à¥‡ में ठीक हो जाता है।
* जटिलताà¤à¤‚
खसरे से निमोनिया, कान का संकà¥à¤°à¤®à¤£, तपेदिक, मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• शोथ और कà¤à¥€ कà¤à¥€ दिल का शोथ हो जाने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ होती है। कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤¿à¤¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में खसरे से होने वाली जटिलताओं की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। दूसरी ओर कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ अपने आप में बहà¥à¤¤ ही आम समसà¥à¤¯à¤¾ है और इससे à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ को खसरा होने का खतरा होता है। खसरे से होने वाली मौतें असल में खसरे से हà¥à¤ निमोनिया से होती हैं।
* इलाज और बचाव
खसरे के वायरस से बचाव का कोई रासà¥à¤¤à¤¾ नहीं है। पैरासिटेमॉल से बà¥à¤–ार कम किया जा सकता है। खसरे के कारण हो जाने वाला निमोनिया काफी खतरनाक होता है। जलà¥à¤¦à¥€ से जलà¥à¤¦à¥€ à¤à¤®à¥‹à¤•à¥à¤¸à¥€à¤¸à¥€à¤²à¥€à¤¨ से इलाज शà¥à¤°à¥ कर दें। अनà¥à¤¯ संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ से बचाव के लिठविटामिन ठà¤à¥€ दें। कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ से बचाव के लिठआहार देते रहना ज़रूरी है। खसरे से बचाव का सबसे सही तरीका है बचà¥à¤šà¥‡ को खसरे को टीका लगवाना। संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बचाव के लिठबचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¥€à¤¡à¤¼ वाली जगहों में ले जाने से बचें।
खसरे जैसी अनà¥à¤¯ बीमारियॉं
कà¥à¤› और वायरस से होने वाली बीमारियॉं खसरे के हलà¥à¤•े हमले जैसी होती हैं। खसरे के टीके से इन बीमारियों से बचाव नहीं होता। इसलिठअगर बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¤¸à¥€ कोई बीमारी हो जाठतो खसरे के टीके के असरकारी होने के बारे में शक नहीं करिà¤à¥¤ इन बीमारियों में कोई जटिलताà¤à¤‚ नहीं होतीं। पैरासिटेमॉल से बà¥à¤–ार का इलाज किया जा सकता है।
* होमà¥à¤¯à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¤¿à¤• और टिशॠरेमेडी
होमà¥à¤¯à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¤¿à¤• उपचार à¤à¥€ अपनाया जा सकता है। आरसेनिकम, बैलाडोना, बà¥à¤°à¤¾à¤¯à¥‹à¤¨à¤¿à¤†, फैरम फॉस, कामोमिला, डà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤°à¤¾, मरकरी सोल, पलà¥à¤¸à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¾, रूस टॉकà¥à¤¸, सिलीसिआ, सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤®à¥‹à¤¨à¤¿à¤…म, सलà¥à¤«à¤° आदि में से दवा चà¥à¤¨à¥‡à¤‚। टिशॠरेमेडी के लिठकाल फॉस, फैरम फॉस, काली मूर, काली सà¥à¤²à¥à¤« या सिलिका में से दवा चà¥à¤¨ सकते हैं।
* रूबैला (जरà¥à¤®à¤¨ मीज़ल)
यह à¤à¤• हलà¥à¤•ी बीमारी है। इसमें à¤à¥€ बà¥à¥à¤–ार और चकतà¥à¤¤à¥‡ होते हैं और इस तरह से यह खसरे से मिलती जà¥à¤²à¤¤à¥€ है। यह à¤à¥€ वायरस सेे होने वाला संकà¥à¤°à¤®à¤£ है। यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ 5 से 9 साल के बीच के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को होता है। चकतà¥à¤¤à¥‡ होने के पहले और बाद के हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ में यह बीमारी संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• होती है। à¤à¤• बार छूत होने से ज़िदगी à¤à¤° के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पैदा हो जाती है।
* लकà¥à¤·à¤£
संकà¥à¤°à¤®à¤£ के 2 से 3 हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ बाद ही लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देने शà¥à¤°à¥ होते हैं। सबसे पहले आम जà¥à¤•ाम होता है। कà¤à¥€ कà¤à¥€ चकतà¥à¤¤à¥‡ ठीक से नहीं उà¤à¤°à¤¤à¥‡à¥¤ कà¤à¥€ कà¤à¥€ ये केवल 1 से 2 दिनों तक ही रहते हैं। रूबैला के चकतà¥à¤¤à¥‡ चेहरे, छाती और पेट पर होते हैं। à¤à¤• आम लकà¥à¤·à¤£ है गरà¥à¤¦à¤¨ पर गांठें होना, ये गांठें चकतà¥à¤¤à¥‡ होने के à¤à¤• हफà¥à¤¤à¥‡ के अंदर होती हैं। ये गाठें चकतà¥à¤¤à¥‡ ठीक होने के बाद 2 से 3 हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक रह सकती हैं। गरà¥à¤¦à¤¨ और कानोंं के पीछे की लसिका गà¥à¤°à¤‚थियॉं à¤à¥€ इनसे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकती हैं। कà¤à¥€ कà¤à¥€ हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाओं में दरà¥à¤¦ à¤à¥€ होता है।
गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं में रूबैल काफी खतरनाक होता है। वायरस नाड़ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ शिशॠको नà¥à¤•सान पहà¥à¤à¤šà¤¾ सकता है। जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ शिशॠको मोतियाबिंद, दिल की बीमारियॉं, बहरापन, दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤ªà¤Ÿà¤² की बीमारियॉं, खून बहने की पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¤¿, सबलवाय, मानसिक विकास में कम, हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में गड़बड़ियॉं औशà¥à¤° तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° में गड़बड़ियॉं आदि जटिलताà¤à¤‚ संà¤à¤µ हैं। इसलिठगरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को रूबैला से बचाना बहà¥à¤¤ ज़रूरी होता है। अगर किसी गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला को यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो जाठतो उसे गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ की सलाह दी जानी चाहिà¤à¥¤ लेकिन अचà¥à¤›à¤¾ होगा की हरेक बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¤®.à¤à¤®.आर. का टीका लगे|
* बचाव
à¤à¤®. à¤à¤®. आर. टीके से रूबैला से बचाव के लिठà¤à¤• अवà¥à¤¯à¤µ à¤à¥€ डाला जाता है। पर यह मंहंगा होता है और अà¤à¥€ तक मॉं बचà¥à¤šà¤¾ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® का हिसà¥à¤¸à¤¾ नहीं बन पाया है।
* छोटी माता (चिकन पॉकà¥à¤¸)
छोटी माता à¤à¥€ à¤à¤• वायरस से होने वाली बीमारी है जो आमतौर पर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को ही होती है। à¤à¤• बार बीमारी होने से पैदा हà¥à¤ˆ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ जीवन à¤à¤° रहती है। हाल में इसके लिठटीका à¤à¥€ बनने लगा है। बचपन में छोटी माता से कोई à¤à¥€ खराब असर नहीं होता और यह खसरे के मà¥à¤•ाबले कम परेशान करने वाला संकà¥à¤°à¤®à¤£ है।
अगर बचपन में छोटी माता न हो तो बड़ी उमà¥à¤° में यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने से काफी नà¥à¤•सान हो सकता है। कà¤à¥€ कà¤à¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤£ के बाद छोटी माता का वायरस तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाओं की जड़ों में निषà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯ पड़ा रहता है। कà¤à¥€ कà¤à¥€ यह हरà¥à¤ªà¥€à¤œà¤¼ ज़ोसà¥à¤Ÿà¤° के रूप में उà¤à¤° आता है। यह तà¥à¤µà¤šà¤¾ के ऊपर तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाओं की जड़ों पर à¤à¤• शà¥à¤°à¤‚खला के रूप में उà¤à¤°à¤¤à¤¾ है।
* लकà¥à¤·à¤£
छोटी माता का संकà¥à¤°à¤®à¤£ हवा में मौजूद à¤à¤• वायरस से होता है। वायरस के शरीर में घà¥à¤¸à¤¨à¥‡ के दो हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ बाद ही लकà¥à¤·à¤£ उà¤à¤°à¤¨à¥‡ शà¥à¤°à¥ होते हैं। बीमारी ठंड लगने और कंपकंपी आने से शà¥à¤°à¥ होती है जो कि 2 से 3 दिनों तक चलता है। बà¥à¤–ार के कम होने के बाद चकतà¥à¤¤à¥‡ उà¤à¤°à¤¤à¥‡ हैं। ये चकतà¥à¤¤à¥‡ चेहरे या हाथ पैर की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में छाती और पेट पर ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होते हैं। ये दाने या चकतà¥à¤¤à¥‡ 2 से 4 दिनों के अंदर अंदर à¤à¥à¤‚डों में निकलते हैं। शà¥à¤°à¥ में ये लाल रंग के होते हैं और फिर पीप से à¤à¤° जाते हैं।
4 से 5 दिनों के अंदर अंदर निरोगण शà¥à¤°à¥ हो जाता है। दाने सूख जाते हैं उन पर पपड़ी जम जाती है और निशान à¤à¥€ पूरी तरह से मिट जाता है। पपड़ी जमने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ तक आते आते संकà¥à¤°à¤®à¤£ लगà¤à¤— ठीक हो चà¥à¤•ा होता है और इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ तक यह असंकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• à¤à¥€ होता है। बहà¥à¤¤ ही कà¤à¥€ कà¤à¥€ छोटी माता से निमोनिया और मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• शोथ हो जाते हैं। à¤à¤¸à¤¾ उन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में होता है जिनका पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ तंतà¥à¤° कमज़ोर हो।
* इलाज
ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में पैरासिटेमॉल ही काफी होती है। परनà¥à¤¤à¥ à¤à¤¸à¤¾à¤¯à¤•à¥à¤²à¥‹à¤µà¥€à¤° से छोटी माता और हरà¥à¤ªà¥€à¤œà¤¼ बहà¥à¤¤ जलà¥à¤¦à¥€ ठीक हो जाते हैं। यह उन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में उपयोगी है जिनकी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कमज़ोर हो। 40 से 50 मिली गà¥à¤°à¤¾à¤® दवा दिन में 4 से 5 बार, पॉंच à¤à¤¾à¤—ों में बांट कर 7 दिनों तक दी जानी चाहिà¤à¥¤ इलाज काफी मंहंगा होता है। परनà¥à¤¤à¥ इससे बहà¥à¤¤ तेज़ी से फायदा होता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि चकतà¥à¤¤à¥‡ à¤à¤•दम से ठीक हो जाते हैं। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में अब छोटी माता का टीका उपलबà¥à¤§ है पर यह बहà¥à¤¤ मंहंगा होता है।
* दोहद
पीका मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की इचà¥à¤›à¤¾ को कहते हैं। दीवारों की सफेदी, राख, चूना और चॉक आदि खाने की इचà¥à¤›à¤¾ à¤à¥€ होती है। पीका लोहे की कमी, कैलशियम या ज़िंक की कमी, कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ या कà¤à¥€ कà¤à¥€ मानसिक आà¤à¤¾à¤µ के कारण होता है। पेट में कीड़े होना à¤à¥€ पीका का à¤à¤• कारण हो सकता है। पीका 6 से 7 महीनों की उमà¥à¤° में होता है और दो साल तक चल सकता है। गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को à¤à¥€ à¤à¤¸à¥€ इचà¥à¤›à¤¾ हो सकती है। पीका खà¥à¤¦ कीड़ों के संकà¥à¤°à¤®à¤£ का ज़रिया होता है।
* इलाज
इलाज में पोषण में सà¥à¤§à¤¾à¤°, बाहर से कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® लोहा आदि देना शामिल होते हैं। अगर दो साल की उमà¥à¤° के बाद à¤à¥€ पीका चलता रहे तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाà¤à¤‚। तब यह इनà¥à¤œà¥ˆà¤•à¥à¤¶à¤¨à¥‹à¤‚ से ठीक हो सकता है।
| --------------------------- | --------------------------- |